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जगदीश थिंद
**मोगा, 15 अक्टूबर:**
पंजाब सरकार के नशे के खिलाफ अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ के तहत जिला प्रशासन मोगा द्वारा आज डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में मिशन सारथी – ‘जो दूसरों को राह दिखाते हैं, उनका मार्गदर्शन’ के अंतर्गत नशे के प्रति जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 43 सरकारी और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों तथा गाइडेंस काउंसलरों ने भाग लिया।
जिले में नशे के खिलाफ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा मोगा जिले के 20 क्षेत्रों को विशेष ध्यान देने के लिए चुना गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता, काउंसलिंग और रोकथाम संबंधी प्रयासों को मजबूत करना है। मिशन सारथी की शुरुआत स्कूलों में करियर काउंसलिंग और विद्यार्थियों के उचित मार्गदर्शन के साथ-साथ नशे के प्रति जागरूकता तथा प्रारंभिक स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान श्री दीप कालड़ा, निदेशक, एक्ट ह्यूमन; डॉ. गौरवप्रीत सिंह, पी.सी.एम.एस., डिप्टी मेडिकल कमिश्नर, मोगा; डॉ. चरणप्रीत सिंह, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं मनोचिकित्सक; डॉ. रविश अरोड़ा, एम.डी., निदेशक, ग्लोबल चाइल्ड वेलनेस इंस्टीट्यूट (जी.सी.डब्ल्यू.आई.), लुधियाना तथा श्री सचिन कुमार, वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक एवं सेंटर हेड, जी.सी.डब्ल्यू.आई., मोगा द्वारा विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए।
प्रशिक्षण के दौरान किशोरावस्था के बच्चों में नशे के सेवन, नशे के प्रति संवेदनशील एवं जोखिमग्रस्त विद्यार्थियों की पहचान, व्यवहारिक और चिकित्सकीय संकेतों को समझने, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की तकनीकों, साथियों के दबाव से निपटने, वास्तविक मामलों पर आधारित अध्ययन तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ उपचार एवं पुनर्वास के लिए रेफर करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
इस अवसर पर डिप्टी कमिश्नर श्री सागर सेतिया, आई.ए.एस. ने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने विद्यार्थियों के सच्चे अर्थों में ‘सारथी’ बनें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का बच्चों के साथ प्रतिदिन संपर्क रहता है, जिसके कारण वे विद्यार्थियों के व्यवहार में होने वाले बदलावों और नशे की ओर बढ़ने के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन, सहानुभूति और समय पर सहायता प्रदान करके नशे की समस्या को रोकने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।
एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) श्री जसपिंदर सिंह, आई.ए.एस. ने सभी स्कूल प्रिंसिपलों और गाइडेंस काउंसलरों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने स्कूलों में ऐसी व्यवस्था स्थापित करें, जिसके माध्यम से नशे के जोखिम वाले विद्यार्थियों की शुरुआती स्तर पर पहचान, संवेदनशील तरीके से काउंसलिंग, अभिभावकों की भागीदारी तथा आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों की सहायता समय पर सुनिश्चित की जा सके।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मिशन सारथी के माध्यम से स्कूलों को नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाने और युवाओं को सही दिशा देने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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